मावली में 10 लाख के अनुमानित खर्च से लगा पशु मेला, चौथे दिन भी सूना रहा मैदान

मावली (उदयपुर)। पशुपालकों को प्रोत्साहित करने और पशुपालन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मावली के विशन जी की छापर स्थित मेला मैदान में जिला स्तरीय पशु मेले का आयोजन किया जा रहा है। पशुपालन विभाग, उदयपुर की ओर से 6 से 11 अक्टूबर तक आयोजित इस मेले में चौथे दिन भी पशुपालकों और ग्रामीणों की अपेक्षित भीड़ नजर नहीं आई। ऐसे में मेले के प्रचार-प्रसार और आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

लाखों के अनुमानित खर्च के बावजूद कम रही भागीदारी

जानकारी के अनुसार, मेले के आयोजन पर करीब 10 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया जा रहा है। वहीं, आयोजन के लिए लगभग 25 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इसके बावजूद मेला मैदान में कम संख्या में लोगों की मौजूदगी ने आयोजन की तैयारियों और इसकी जानकारी आमजन तक पहुंचाने के प्रयासों पर सवाल खड़े किए हैं।

जिला स्तरीय पशु मेले का उद्देश्य तभी प्रभावी हो सकता है, जब इसकी जानकारी अधिक से अधिक पशुपालकों, किसानों और ग्रामीणों तक पहुंचे तथा वे इसमें भाग लेकर योजनाओं और पशुपालन से जुड़ी गतिविधियों का लाभ उठा सकें। लेकिन मेले में कम भागीदारी के बीच प्रचार-प्रसार की व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है।

प्रेस नोट को लेकर भी सामने आई स्थिति

मेले के संबंध में प्रेस नोट जारी किए जाने को लेकर पूछे जाने पर विभाग की ओर से अनभिज्ञता और समय के अभाव की बात कही गई। साथ ही, आगे से व्यवस्था में सुधार करने का आश्वासन दिया गया।

आखिर प्रचार-प्रसार की व्यवस्था क्यों नहीं हुई प्रभावी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पशु मेले के आयोजन पर लाखों रुपये खर्च होने का अनुमान है और कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है, तो इसकी जानकारी व्यापक स्तर पर पशुपालकों और ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए क्या प्रयास किए गए? क्या गांवों में सूचना पहुंचाने, स्थानीय मीडिया के माध्यम से प्रचार करने और पशुपालकों को आमंत्रित करने की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी?

Spread the love