उदयपुर में भूत बनकर युवक सड़कों पर घूमा,रस्सियों से बांधा, गणगौर पर निभाई गई 50 साल पुरानी परंपरा

उदयपुर, मेवाड़ की धरती अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जानी जाती है और गणगौर उत्सव के दौरान उदयपुर का भोईवाड़ा इलाका इसी का साक्षी बना। शुक्रवार को माली समाज की ओर से ‘दातन हेला’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें सबसे बड़ा आकर्षण ‘भूत’ की डरावनी झांकी रही। इस खास आयोजन को देखने के लिए शहर की तंग गलियों में हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। परंपरा के अनुसार, इस डरावने रूप को ‘भोलेनाथ की चेली’ यानी भूत मानकर पूजा जाता है।

रस्सियों से बंधा ‘भूत’ और नकारात्मकता का अंत

पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही इस परंपरा में समाज के ही एक युवक को भूत का रूप दिया जाता है। उसे रस्सियों से मजबूती से बांधकर पूरे क्षेत्र में घुमाया जाता है। स्थानीय निवासियों का यह अटूट विश्वास है कि नए साल की शुरुआत में इस तरह प्रतीकात्मक भूत को बांधकर मोहल्ले में घुमाने से इलाके की सारी बीमारियां, नकारात्मकता और बुरी शक्तियां दूर हो जाती हैं।

उत्साह, प्रसाद और जीवंत संस्कृति

ढोल-नगाड़ों की गूंज और जयकारों के बीच जब यह झांकी निकली, तो पूरा माहौल ऊर्जा से भर गया। इस दौरान भांग और भुजिया का प्रसाद भी वितरित किया गया। दिलचस्प बात यह है कि इस ‘भूत’ को देखकर कोई डरता नहीं, बल्कि हर घर के दरवाजे पर लोग उसे बड़े प्यार से खिलाते-पिलाते हैं। युवा पीढ़ी भी अपने बुजुर्गों से सीखी इस विरासत को पूरे जज्बे के साथ आगे बढ़ा रही है।

चार दिनों तक सजेगी गणगौर की शाही सवारी

उत्सव का रोमांच यहीं खत्म नहीं होता। शनिवार शाम 4 बजे से भव्य शाही सवारी का आगाज होगा, जो अगले चार दिनों तक शहर की सुंदरता में चार चांद लगाएगी। पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजी महिलाएं सिर पर गणगौर माता की प्रतिमाएं लेकर पिछोला झील के गणगौर घाट पहुंचेंगी, जहाँ लोक गीतों के बीच माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।

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