ईडाणा माता का अलौकिक चमत्कार, 11 महीने बाद मां ने किया अग्नि स्नान, 12 फीट ऊंची उठीं लपटें

उदयपुर। मेवाड़ की शक्तिपीठ और आस्था के प्रमुख केंद्र ईडाणा माता मंदिर में गुरुवार सुबह एक बार फिर प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। करीब 11 महीने के अंतराल के बाद माताजी ने स्वयं प्रज्वलित अग्नि में ‘अग्नि स्नान’ किया। सुबह करीब 8 बजकर 50 मिनट पर अचानक मंदिर परिसर से आग की लपटें उठने लगीं, जो देखते ही देखते 12 फीट से ज्यादा ऊंचाई तक जा पहुँचीं। इस अद्भुत दृश्य को देख वहां मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा परिसर ‘माताजी के जयकारों’ से गूंज उठा।

लोक मान्यता है कि जब माता प्रसन्न होती हैं, तो वे स्वयं अग्नि स्नान करती हैं। इस चमत्कार की खास बात यह है कि अग्नि स्नान का न तो कोई समय तय होता है और न ही कोई दिन; यह पूरी तरह माता की इच्छा पर निर्भर करता है। गुरुवार को हुए इस स्नान के दौरान मंदिर में अर्पित चुनरी, नारियल और अन्य सामग्री पूरी तरह स्वाहा हो गई, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से माताजी की मुख्य प्रतिमा और उनके श्रृंगारिक आभूषणों को आंच तक नहीं आई। श्रद्धालुओं के लिए यह किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं है कि भीषण लपटों के बीच भी प्रतिमा सुरक्षित बनी रहती है।

मेवल क्षेत्र के 52 गांवों की आराध्य देवी ईडाणा माता के इस अग्नि स्नान के साक्षी बनने वाले भक्त खुद को बेहद सौभाग्यशाली मानते हैं। मंदिर के इतिहास के अनुसार, इससे पूर्व माता ने 18 मार्च 2025 को अग्नि स्नान किया था। बरगद के विशाल पेड़ के नीचे विराजित माता रानी के दरबार में लकवा ग्रस्त रोगियों के ठीक होने और नि:संतान दंपत्तियों की मनोकामना पूर्ण होने की गहरी आस्था जुड़ी है। मन्नत पूरी होने पर यहां भक्त त्रिशूल और झूले अर्पित करते हैं। गुरुवार को हुए इस दिव्य स्नान की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु दर्शनों के लिए उमड़ पड़े।

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