रिश्वत के पैसों के साथ 10 फीट गहरे कीचड़ में कूदा इंजीनियर, खौफ से गीली हुई पैंट

भ्रष्टाचार की दीमक किस कदर सरकारी तंत्र को खोखला कर रही है, इसकी एक शर्मनाक और रूह कंपा देने वाली तस्वीर भरतपुर से सामने आई है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत लोगों के घरों को रोशन करने की फाइलों पर कुंडली मारकर बैठे बिजली विभाग के दो इंजीनियरों ने रिश्वतखोरी का ऐसा खेल रचा कि अंत में उनकी सारी हेकड़ी धरी की धरी रह गई। सहायक अभियंता (AEN) मोहित कटियार और कनिष्ठ अभियंता (JEN) अभिषेक गुप्ता ने सोलर प्लांट की फाइलों को पास करने की एवज में मानवता को ताक पर रख दिया। प्रति फाइल पांच हजार रुपये की मांग करते हुए इन अधिकारियों ने 18 फाइलों के बदले 90 हजार रुपये का सौदा तय किया था, लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि जिस ‘काली कमाई’ के लिए वे आम जनता को तरसा रहे हैं, वही उनके पतन का कारण बनेगी।

एसीबी की टीम जब कार्रवाई करने पहुंची, तो वहां का मंजर किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं था। रिश्वत की पहली किस्त हाथ में आते ही जैसे ही जेईएन अभिषेक गुप्ता को टीम की भनक लगी, उसका रसूख और पद का घमंड पल भर में हवा हो गया। खुद को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए वह रिश्वत के पैसे स्कूटी की डिक्की में डालकर बदहवास होकर भागने लगा। तीन किलोमीटर तक एसीबी ने उसका पीछा किया और जब चारों तरफ से खुद को घिरा पाया, तो पकड़े जाने के खौफ ने उसे इस कदर सुध-बुध खोने पर मजबूर कर दिया कि उसने करीब 10 फीट गहरे गंदे नाले में छलांग लगा दी। नाले के कीचड़ और गंदगी में फंसे उस ‘साहब’ की हालत इतनी दयनीय हो गई कि घबराहट और दहशत के मारे उसकी पैंट तक गीली हो गई। जिस अधिकारी के एक हस्ताक्षर के लिए लोग घंटों दफ्तरों के चक्कर काटते थे, वह आज घुटनों और पैरों में चोट खाए, कीचड़ से लथपथ होकर सलाखों के पीछे जाने को मजबूर था।

इस पूरे कांड का सबसे कड़वा सच यह है कि एक तरफ सरकार गरीबों के घरों में सोलर पैनल के जरिए रोशनी पहुंचाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ये ‘कुर्सी के सौदागर’ सब्सिडी की फाइलों को रिश्वत की भेंट चढ़ा रहे थे। एईएन मोहित कटियार ने तो गिरफ्तारी से बचने के लिए आगरा तक का रास्ता नापा, लेकिन कानून के लंबे हाथों ने उसे भी नहीं बख्शा। आज जब एक कर्मचारी उस आरोपी इंजीनियर की गीली पैंट को धूप में सुखा रहा था, तो वह नजारा पूरे सरकारी सिस्टम पर एक करारा तमाचा था। एसीबी की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा महल चाहे कितना भी ऊंचा क्यों न हो, जब कानून का हथौड़ा चलता है, तो बड़े-बड़े सूरमाओं का गुरूर भी नाले की गंदगी में मिल जाता है।

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