‘उदयपुर फाइल्स’ पर भाजपा में रार: दो गुटों में बंटी पार्टी, निगम चुनाव में नुकसान का डर और साख बचाने की जद्दोजहद

सियासी पारा सातवें आसमान पर, पार्टी आलाकमान के फैसले पर सबकी टिकी नजरें

उदयपुर। झीलों की नगरी में इन दिनों सियासी पारा सातवें आसमान पर है। भाजपा की एक महिला नेत्री से जुड़े कथित ‘वीडियो कांड’ ने पार्टी के भीतर ही दो फाड़ कर दिए हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है और जांच अधिकारी बदले जा रहे हैं, भाजपा के अंदरूनी खेमों में हलचल तेज हो गई है। एक धड़ा जहां इसे पार्टी की छवि पर ‘कालिख’ मानकर दागी नेताओं की विदाई की मांग कर रहा है, वहीं दूसरा धड़ा इसे राजनीतिक षडयंत्र बताकर आलाकमान के सामने अपनी बेगुनाही का दम भर रहा है। मामला अब दिल्ली और जयपुर के गलियारों तक पहुंच चुका है, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राष्ट्रीय नेतृत्व को पल-पल की अपडेट दी जा रही है।

पार्टी का पहला गुट बेहद आक्रामक है। इनका तर्क है कि यदि इस कांड में शामिल पदाधिकारियों को पदों से नहीं हटाया गया, तो आगामी नगर निगम चुनाव में विपक्ष इसे ‘उदयपुर फाइल्स’ के नाम पर बड़ा मुद्दा बनाएगा। वरिष्ठ नेताओं को भेजी गई शिकायत में साफ कहा गया है कि चारित्रिक आरोपों से घिरे नेताओं के पद पर रहते हुए जनता के बीच जाना मुश्किल होगा और संगठन को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, दूसरा पक्ष पूरी तरह बचाव की मुद्रा में है। दो केंद्रीय मंत्रियों के जरिए अपनी बात दिल्ली तक पहुंचा रहे इन नेताओं का कहना है कि वे केवल दुष्प्रचार का शिकार हुए हैं और बिना किसी ठोस सबूत के इस्तीफा देना अपनी हार स्वीकार करने जैसा होगा।

यह पूरा विवाद 11 फरवरी को तब शुरू हुआ जब एक महिला नेत्री ने वकील पर अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का मुकदमा दर्ज करवाया। पुलिस की आधी रात की कार्रवाई और वकील के घर में हुई तोड़फोड़ ने मामले को और पेचीदा बना दिया। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया की जनसुनवाई में जब आरोपी के परिवार ने पुलिस और भाजपा नेताओं की कार्यशैली पर सवाल उठाए, तो मामला पूरी तरह राजनीतिक हो गया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा में इस मुद्दे को उछालकर भाजपा को बैकफुट पर धकेल दिया है, वहीं हनुमान बेनीवाल और राजकुमार रोत जैसे नेता भी इस पर तीखे प्रहार कर रहे हैं।

फिलहाल, पुलिस की निष्पक्ष जांच और पार्टी आलाकमान के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति है कि आखिर यह ‘उदयपुर फाइल्स’ का जिन्न किस-किस की कुर्सी ले डूबेगा।

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