बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्ट जेल से बाहर

“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं”

उदयपुर। फिल्म बनाने के नाम पर 30 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी के मामले में जेल में बंद रहे बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्ट आज उदयपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए। करीब 2 महीने 11 दिन जेल में रहने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिलने पर रिहाई मिली।

जेल से बाहर आते ही उन्होंने सबसे पहले परिसर स्थित शिव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन कर मत्था टेका। मीडिया से बातचीत में भट्ट ने कहा— “मेवाड़ की तासीर ही अलग है। यहां कहा जाता है कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। मुझे उम्मीद नहीं, पूरा यकीन था कि सच्चाई सामने आएगी।”

उन्होंने आगे कहा कि जेल में रहते हुए उन्हें मेवाड़ की मिट्टी और उसके संस्कारों के बारे में जानने का अवसर मिला। “मैं कृष्ण भक्त हूं। मैं वहीं रहा हूं जहां श्रीकृष्ण पैदा हुए थे। अब मैं पहले से बेहतर और दोगुना मजबूत इंसान बनकर बाहर आया हूं। इस देश के कानून पर मुझे पूरा भरोसा है।”

सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने नियमित जमानत दी। इससे पहले 13 फरवरी को श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम जमानत मिल चुकी थी। विक्रम भट्ट को 7 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता केंद्र (मिडिएशन सेल) में जाकर आपसी समझौते से मामला सुलझाने की सलाह दी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह एक प्रकार का कमर्शियल (व्यापारिक) विवाद प्रतीत होता है और इसे अनावश्यक रूप से मुंबई ट्रांसफर करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

मुंबई से की गई थी गिरफ्तारी

7 दिसंबर को उदयपुर डीएसपी छगन राजपुरोहित के नेतृत्व में 6 सदस्यीय टीम मुंबई पहुंची थी। पुलिस ने जुहू स्थित गंगाभवन कॉम्प्लेक्स के फ्लैट से विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया था।

बायोपिक के नाम पर निवेश का आरोप

राजस्थान के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने 17 नवंबर को विक्रम भट्ट समेत 8 लोगों के खिलाफ 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था।

आरोप है कि डॉ. मुर्डिया की पत्नी की बायोपिक बनाने और चार फिल्मों के निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपए का निवेश लिया गया। शिकायत के अनुसार विभिन्न खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई।

मामले में कोर्ट की टिप्पणी और जमानत के बाद अब सभी की निगाहें आगामी कानूनी प्रक्रिया और संभावित मध्यस्थता पर टिकी हैं।

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