नामचीन हस्तियों की ‘फोटो’ लगा 4 राज्यों में करोड़ों की चपत, भीलवाड़ा के व्यापारी से 40 लाख ठगने वाला शातिर जालौर से गिरफ्तार

भीलवाड़ा। साइबर ठगी के जरिए प्रतिष्ठित लोगों के नाम का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की चपत लगाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भीलवाड़ा पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। प्रतापनगर थाना पुलिस ने जालौर में दबिश देकर एक ऐसे शातिर ठग को दबोचा है, जो राजस्थान सहित गुजरात, महाराष्ट्र और दिल्ली में ठगी का जाल फैलाए हुए था। आरोपी ने भीलवाड़ा के एक नामी व्यापारी को अपना निशाना बनाते हुए महज दो दिनों में 40 लाख रुपये की मोटी रकम हवाला के जरिए पार कर दी थी।

हवाला के जरिए 40 लाख का ‘खेल’ एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने बताया कि ठगी की यह वारदात जुलाई 2025 में हुई थी। जालौर निवासी आरोपी ईश्वर मेघवाल ने भीलवाड़ा के व्यापारी मीठालाल को झांसे में लेने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची। आरोपी ने अपने वॉट्सऐप पर व्यापारी के परिचित ‘पृथ्वीराज कोठारी’ की फोटो (DP) लगाई और ट्रूकॉलर पर भी वही नाम दर्ज किया। इसके बाद उसने व्यापारी को कॉल कर विश्वास दिलाया कि उसे अहमदाबाद में अर्जेंट पेमेंट की जरूरत है। अपने परिचित की आवाज और फोटो पर भरोसा कर व्यापारी ने बिना सोचे-समझे 40 लाख रुपये हवाला के माध्यम से ट्रांसफर करवा दिए। बाद में हकीकत सामने आने पर व्यापारी के होश उड़ गए और उसने मामला दर्ज कराया।

तकनीकी जाल बुनकर पुलिस ने दबोचा सीआई राजपाल सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने मोबाइल डेटा और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से आरोपी का पीछा किया। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने आरोपी ईश्वर मेघवाल की पहचान पुख्ता की और उसे जालौर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ने केवल भीलवाड़ा ही नहीं, बल्कि देश के चार बड़े राज्यों में साइबर ठगी की कई वारदातों को अंजाम दिया है। आरोपी के पास से ठगी के तरीकों और गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में अहम सुराग मिले हैं।

मोडस ऑपरेंडी: ट्रूकॉलर और वॉट्सऐप का घातक मेल पुलिस जांच में सामने आया कि जालौर और बालोतरा क्षेत्र के युवकों ने मिलकर यह हाईटेक गिरोह बनाया है। इनका काम करने का तरीका बेहद शातिर है। ये लोग सबसे पहले किसी नामी-गिरामी व्यक्ति को चुनते हैं, फिर उसकी फोटो और नाम का इस्तेमाल कर फर्जी डिजिटल पहचान बनाते हैं। जब कोई व्यक्ति ट्रूकॉलर पर नंबर चेक करता है, तो उसे प्रतिष्ठित व्यक्ति का नाम दिखता है, जिससे वह आसानी से झांसे में आ जाता है। गिरोह के सदस्य अक्सर ‘हवाला’ का रास्ता चुनते हैं ताकि बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए पकड़े जाने का खतरा कम रहे।

अन्य सदस्यों की तलाश जारी पुलिस अब इस गिरोह के बाकी सदस्यों की सरगर्मी से तलाश कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि इस गिरफ्तारी के बाद देश के अन्य हिस्सों में हुई कई बड़ी ठगी की वारदातों से पर्दा उठ सकता है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले कॉल करने वाले की पहचान की भौतिक रूप से पुष्टि जरूर करें, चाहे मोबाइल पर नाम और फोटो कितनी ही परिचित क्यों न दिखे।

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