
जयपुर। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में चल रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मकड़जाल को तोड़ने के लिए भजनलाल सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने स्कीम में सेंधमारी करने वाले 6 बड़े फार्मा स्टोर्स के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 4 पर एफआईआर दर्ज कराई है, जबकि 2 स्टोर को योजना से पूरी तरह बाहर (डी-इम्पैनल) कर दिया गया है। इस पूरे घोटाले की आंच अब सरकारी महकमों तक भी पहुंच गई है, जिसके चलते पुलिस और आयुर्वेद विभाग के कुल 14 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। जांच के घेरे में अभी 19 और सरकारी कर्मचारी हैं, जिन पर विभागीय कार्रवाई और रिकवरी की तलवार लटक रही है।
हवा में बिकी दवाइयां, बिना खरीदे बना दिए 27 लाख के बिल इस फर्जीवाड़े का सबसे चौंकाने वाला पहलू भीलवाड़ा में सामने आया है। यहाँ के ‘हरिकृष्णा मेडिकल स्टोर’ और ‘सावरिया फार्मा स्टोर’ ने धोखेबाजी की सारी हदें पार कर दीं। राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ हरजीलाल अटल के मुताबिक, इन स्टोर्स ने बाजार से न तो दवाइयां खरीदीं और न ही महंगे इंजेक्शन, लेकिन कागजों में इन्हें RGHS लाभार्थियों को बेचना दिखाकर सरकार से करीब 27 लाख रुपये का भुगतान उठा लिया। जांच में जब स्टॉक रजिस्टर और खरीद के बिलों का मिलान किया गया, तो स्टोर संचालक कोई भी सबूत पेश नहीं कर सके। इस गंभीर धोखाधड़ी के बाद दोनों स्टोर्स के ड्रग लाइसेंस सस्पेंड कर उनके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करा दिया गया है।
पर्चियों में हेराफेरी और मिलीभगत का खेल फर्जीवाड़े की जड़ें केवल भीलवाड़ा तक ही सीमित नहीं हैं। नागौर के रेन और जायल स्थित कॉन्फेड फार्मा स्टोर्स पर भी आरजीएचएस की पर्चियों में छेड़छाड़ कर गलत तरीके से भुगतान लेने के पुख्ता सबूत मिले हैं, जिसके बाद वहां भी एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, बीकानेर की कॉन्फेड शॉप नंबर 06 और हनुमानगढ़ की शॉप नंबर 05 को गंभीर अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्ट करते हुए योजना से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। विभाग के आला अधिकारियों का मानना है कि यह करोड़ों का घोटाला मेडिकल फर्मों और सरकारी कर्मचारियों की गहरी मिलीभगत के बिना मुमकिन नहीं था। कई मामलों में तो कर्मचारी की आईडी का इस्तेमाल कर बिना उसकी जानकारी के ही दवाइयां इश्यू कर दी गईं।
अब तक 68 कर्मचारी सस्पेंड, रिकवरी की तैयारी तेज सरकार इस मामले में कड़ा रुख अपनाए हुए है। सीईओ हरजीलाल अटल ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। ताजा कार्रवाई में पुलिस विभाग के 4 और आयुर्वेद विभाग के 10 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। इससे पहले भी विभाग इसी तरह के मामलों में 54 कर्मचारियों को सस्पेंड कर चुका है, जिससे अब निलंबित कर्मचारियों का कुल आंकड़ा 68 तक पहुंच गया है। विभाग ने अब उन 19 कर्मचारियों की सूची तैयार की है जिनसे फर्जीवाड़े की राशि वसूल की जानी है। इसके लिए संबंधित विभागों को पत्र जारी कर सख्त विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई से पूरे प्रदेश के फार्मा संचालकों और भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
