
उदयपुर। अशोक नगर स्थित उदासीन आश्रम के श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मुनि अरहसागर महाराज एवं मुनि सुहित सागर महाराज के सानिध्य में चातुर्मास के तहत धार्मिक आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ जारी हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्ज्वलित किया। मुनिश्री के पाद-प्रक्षालन एवं श्रीफल भेंट कर श्रद्धालुओं ने मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में आहारचर्या भी सानंद संपन्न हुई।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष महेंद्र टाया ने बताया कि मुनिश्री की मंगल देशना में 16 कारण भावनाओं की श्रृंखला के अंतर्गत आठवीं भावना ‘साधु-समाधि भावना’ पर प्रकाश डाला गया। इस भावना का मूल उद्देश्य साधु-संतों के संयममय जीवन, आत्मसाधना, तप, स्वाध्याय और समाधि के प्रति श्रद्धा रखते हुए स्वयं भी आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा लेना है। जैन दर्शन में साधु-समाधि भावना का विशेष महत्व है। साधु-संत प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य, समता और आत्मचिंतन बनाए रखते हुए राग-द्वेष से ऊपर उठकर आत्मा के शुद्ध स्वरूप की साधना करते हैं। उनके संयम एवं साधना से प्रेरणा लेकर श्रावक अपने जीवन में भी क्षमा, त्याग, संयम, स्वाध्याय और समभाव को स्थान देने का संकल्प लेता है। साधु-समाधि भावना हमें यह संदेश देती है कि वास्तविक शांति बाहरी सुख-सुविधाओं और सांसारिक आकर्षणों में नहीं, बल्कि मन की स्थिरता तथा आत्मा की निर्मलता में निहित है। साधु-संतों के आदर्श जीवन को देखकर व्यक्ति आत्मचिंतन की ओर प्रेरित होता है और जीवन के वास्तविक लक्ष्य को समझने का प्रयास करता है। यह भावना केवल साधु-संतों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके गुणों को आत्मसात कर स्वयं के जीवन को संयमित, शांत और आध्यात्मिक बनाने की प्रेरणा देती है। ‘साधु जीवन की समाधि में छिपा है आत्मकल्याण का संदेश।’ साधु-समाधि भावना का यही सार है कि सांसारिक सुखों की अपेक्षा आत्मशांति को महत्व दिया जाए और विपरीत परिस्थितियों में भी समता एवं धैर्य बनाए रखा जाए।
पंडित भुवनेश शास्त्री ने बताया कि दिनभर मंदिर में श्रद्धालुओं का आगमन जारी रहा। भक्तों ने पूज्य मुनिश्री के समक्ष श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धर्मसभा में शामिल होकर मंगल देशना का लाभ लिया। शाम 6.30 बजे गुरु भक्ति का आयोजन हुआ। इसके पश्चात छहढाला जी पर प्रवचन एवं आरती संपन्न हुई।
इस अवसर पर धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष कुंथु कुमार जैन, चातुर्मास समिति अध्यक्ष महेंद्र टाया, रमेश वैद, प्रकाश अखावत, राजेंद्र अखावत, शशिकांत शाह, कैलाश गंगवाल, सुमत प्रकाश बालावत, प्रमोद ठोलिया, नरेंद्र टाया, जगदीश जैन, जिनेंद्र गंगावत, जिनेंद्र मेडिस्टेंड, अनिल मोदी, मयंक मोदी, शरण मोदी, मनोहरलाल गंगावत, दिनेश सोनी, दिनेश दवारा, अनिल मेहता, पारस शाह, राजेश गंगवाल, गौरव, प्रणीत, मानमल गंगावत, मनोज कमावत सहित अनेक श्रावक उपस्थित रहे। अर्चना मोदी, अंकिता मोदी, ज्योति अखावत, सर्वेश जैन, निर्मला गंगावत, मंजू गंगावत, मंजू शाह, संगीता दवारा, कल्पना गंगावत, सरोज बोहरा, केशर बाई, कीर्ति सहित अनेक श्राविकाएं उपस्थित रहीं।
