आज जो भी हूँ इस महाविद्यालय की देन हूँ -डॉ सुधीर बक्शी

महाराणा भूपाल कॉलेज पूर्व छात्र परिषद का मासिक स्नेह मिलन समारोह कॉलेज के विवेकानंद सभागार में रविवार सुबह आयोजित हुआ | विशिष्ट अतिथि वॉलकेम वियतनाम माइंस के प्रभारी रहे डॉ सुधीर बक्शी, परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर महीप भटनागर, महासचिव  शांतिलाल भंडारी व सचिव डॉ आर के गर्ग मंचासीन थे | 

सभी का स्वागत करते हुए अध्यक्ष प्रो महीप भटनागर ने कहा कि अब समय आ गया है कि परिषद अपना दयारा बढ़ाते हुए समाजुपयोगी कार्य हाथ में लेकर शहर में अपनी पहचान बनावे | 

महासचिव शांति लाल भंडारी ने नये बने सदस्यो की नियमित उपस्थिति पर हर्ष व्यक्त किया |  डॉ आर के गर्ग ने संचालन करते हुए  विगत माह का प्रतिवेदन पढ़ कर सदन से अनुमोदित कराया |

डॉ एस एस मेहता ने चोटिल होने, डूबने एवं सर्प दंश पर किये जाने वाले प्राथमिक उपचारों के साथ “क्या करें व क्या ना करें” को विस्तार से समझाया ताकि अकस्मात हो जाने पर जान बचाई जा सकें|

अपने उद्बोधन में विशिष्ट अतिथि डॉ सुधीर बक्शी ने कहा कि वे आज जो भी है इस महाविद्यालय की देन है |  यहाँ विश्व स्तरीय स्नात्तकोत्तर शिक्षा के साथ उन्हें बेस्ट स्पोर्ट्समन ऑफ़ द ईयर बनने तक की प्रेरणा मिली | 

मीडिया प्रभारी प्रो विमल शर्मा ने बताया कि इस माह जन्मदिन मना रहे सदस्यो का बहुमान करते हुए सभी के सुंदीर्घ जीवन की मंगलकामना की गई | संस्कृतिक प्रस्तुतियों में शिव रतन तिवारी स्वरचित “चौसर के खेल मैं “, श्रीमती गीता सिंह “दुनिया चले ना श्री राम के बिना “, सुरेश सिशोदिया : स्वरचित समसामयिक छंद, डॉ नरेश शर्मा: रिमझिम के ये प्यारे प्यारे, श्रीमती सीता शर्मा: अपनी आँखों में बसा कर, प्रकाश तातेड़ : स्वरचित कविता “शादी तब और अब” प्रमुख रही | 

धन्यवाद इं एम पी जैन ने ज्ञापित किया व दिवंगत हुए वरिष्ठ साथी चंद्र सिंह मुणोत को दो मिनिट मौन रख श्रद्धांजलि अर्पित की गई|

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