उदयपुर में होमस्टे-पीजी को बड़ी राहत, अब 8 कमरे और 24 बेड तक मंजूरी, केयरटेकर भी संभालेगा संचालन

उदयपुर। पर्यटन सीजन में बढ़ती पर्यटकों की भीड़ और होटलों की कमी को देखते हुए पर्यटन विभाग ने होमस्टे और पेइंग गेस्ट (पीजी) हाउस के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब मकान मालिक 5 की जगह 8 कमरों तक की अनुमति ले सकेंगे। साथ ही एक यूनिट में अधिकतम 24 बिस्तरों की सुविधा दी जाएगी।

सबसे अहम बदलाव यह है कि अब होमस्टे संचालित करने के लिए मकान मालिक का उसी घर में रहना जरूरी नहीं होगा। वह संचालन के लिए केयरटेकर नियुक्त कर सकेगा।

पीक सीजन की समस्या का समाधान

पीक सीजन में शहर में होटल कम पड़ जाते हैं और किराए भी महंगे हो जाते हैं। ऐसे में होमस्टे पर्यटकों के लिए सस्ता और सुविधाजनक विकल्प बनकर उभरते हैं। विभाग का मानना है कि नई पॉलिसी से ज्यादा लोग इस स्वरोजगार से जुड़ सकेंगे और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

वर्तमान में उदयपुर शहर में लगभग 200 से अधिक और पूरे जिले में 500 से ज्यादा होमस्टे संचालित हैं। नए नियमों के बाद इनकी संख्या में और वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।

बड़े मकानों को मिलेगा फायदा

पहले शुद्ध आवासीय मकान में अधिकतम 5 कमरों की अनुमति थी, जिसे अब बढ़ाकर 8 कर दिया गया है। 24 बेड की सीमा से बड़े पुश्तैनी मकानों के मालिकों को सीधा लाभ मिलेगा। ग्रुप में आने वाले पर्यटक अब एक ही स्थान पर ठहर सकेंगे।

केयरटेकर को जिम्मेदारी

पुराने नियमों में मालिक या परिवार के सदस्य का उसी घर में रहना अनिवार्य था। अब यदि मालिक बाहर रहता है, तो वह केयरटेकर नियुक्त कर सकता है।
हालांकि केयरटेकर को सभी नियमों और मानकों का पालन करना होगा और वह संचालन के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होगा।

होटल व्यवसाय पर भी असर

होटल एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि 7-8 कमरों के छोटे होटलों की तुलना में होमस्टे कम लागत में संचालित होते हैं। केयरटेकर व्यवस्था से संचालन और आसान होगा।

विदेशी पर्यटकों की बढ़ेगी पसंद

होटल व्यवसाय से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से ‘कल्चरल टूरिज्म’ को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी पर्यटक अक्सर होटल के बजाय भारतीय परिवारों के साथ रहकर घर का बना पारंपरिक भोजन पसंद करते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और शहर की अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी।

सुरक्षा नियम यथावत

नियमों में ढील के बावजूद सुरक्षा को लेकर सख्ती बरकरार रहेगी।

  • केयरटेकर का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा।
  • पर्यटकों का रिकॉर्ड ई-पर्यटक पोर्टल और सी-फॉर्म के माध्यम से रखना होगा।

पर्यटन विभाग का कहना है कि इस सरलीकरण से सुविधाएं बढ़ेंगी, लेकिन सुरक्षा और नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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