
उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में फिल्म निर्माण के नाम पर 30 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के हाई प्रोफाइल मामले में अदालत ने बॉलीवुड के चर्चित प्रोड्यूसर-डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को तगड़ा झटका दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम 4 न्यायालय के पीठासीन अधिकारी मनीष कुमार जोशी ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। मुंबई के अंधेरी वेस्ट निवासी यह दंपती फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में है। मामले के अनुसार, भूपालपुरा थाने में दर्ज शिकायत में बताया गया था कि आरोपियों ने परिवादी को फिल्म बनाने और उसमें मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि परिवादी से आरटीजीएस के जरिए कुल 44.28 करोड़ रुपये प्राप्त किए गए थे, लेकिन उनमें से केवल दो फिल्में ही बनाई गईं और शेष बड़ी राशि को पुराने बकायों के समायोजन, फर्जी वेंडरों और निजी खातों में ट्रांसफर कर ठिकाने लगा दिया गया।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान परिवादी के विशेष अधिवक्ता मंजूर हुसैन ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए इसे एक संगठित आर्थिक अपराध करार दिया। उन्होंने दलील दी कि आरोपियों ने फर्जी बिल, ओवरवैल्यू वाउचर और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए योजनाबद्ध तरीके से रकम को इधर-उधर किया है। बचाव पक्ष द्वारा स्वास्थ्य आधार पर जमानत की गुहार लगाई गई थी, लेकिन अदालत ने केस डायरी और मेडिकल डिस्चार्ज टिकट का बारीकी से अवलोकन करने के बाद पाया कि दोनों आरोपी चिकित्सकीय रूप से फिट हैं और ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिसके आधार पर उन्हें जमानत दी जाए। अदालत ने व्हाट्सएप चैट, बैंक स्टेटमेंट और गवाहों के बयानों को बेहद गंभीर माना।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ लगी धाराएं बेहद गंभीर प्रकृति की हैं, जिनमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। ऐसे में यदि आरोपियों को जमानत दी जाती है, तो उनके प्रभाव के चलते केस से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों और गवाहों के प्रभावित होने की पूरी आशंका है। इस हाई प्रोफाइल धोखाधड़ी मामले में बैंक ट्रांजेक्शन और फर्जी वेंडरों के नेटवर्क का खुलासा होने के बाद अब पुलिस की जांच का दायरा और बढ़ गया है। उदयपुर की अदालत के इस सख्त रुख ने बॉलीवुड के गलियारों में भी खलबली मचा दी है।
