
महावीर व्यास
उदयपुर। अमी संस्था की ओर से आयोजित राजस्थान लोक विरासत ‘संप’ समारोह के दूसरे दिन साहित्य, सिनेमा और हास्य का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में पुस्तक विमोचन, राजस्थानी सिनेमा का प्रदर्शन और स्टैंड-अप कॉमेडी ने दर्शकों को बांधे रखा।
समारोह के तहत डॉ. डोली मोगरा एवं डॉ. शिवदान सिंह की संयुक्त कृति ‘खाखरा’ का विमोचन कालबेलिया जनजाति के लोक कलाकारों के करकमलों से किया गया। लेखकों ने बताया कि यह डिजिटल पुस्तक जनजातीय समुदायों के बीच जाकर उनके समाज, संस्कृति और जीवन-दर्शन पर आधारित गहन अध्ययन का परिणाम है। जनजातीय प्रतिनिधियों ने पुस्तक में अपने समाज का सटीक और सम्मानजनक चित्रण किए जाने पर संतोष जताया।
पुस्तक ‘खाखरा’ में विश्व की जनजातियों के विकास क्रम के साथ भारत के जनजातीय समाज से उनके संबंधों को रेखांकित किया गया है। साथ ही राजस्थान की जनजातियों के पहनावे, खान-पान, आभूषण, संगीत, लोककला और सांस्कृतिक विविधताओं को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
दूसरे सत्र में राजस्थानी सिनेमा ‘तावडौ’ का निःशुल्क प्रदर्शन किया गया। दर्शकों ने फिल्म के सशक्त किरदारों और अभिनय की जमकर सराहना की। दर्शकों का कहना रहा कि स्थानीय भाषा में स्थानीय कलाकारों द्वारा किया गया सिनेमा अधिक मौलिक और जमीनी होता है। साथ ही भविष्य में लोक कलाकारों को और अधिक अवसर देने की अपेक्षा भी जताई गई।
इसके बाद स्टैंड-अप कॉमेडियन यशराज सिंह ने अपनी प्रस्तुति ‘चुप कर यश’ से माहौल को ठहाकों से भर दिया। उनकी कॉमेडी में मां-बेटी के रिश्ते, जेन-जी के व्यवहार और पारिवारिक बारीकियों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया।
समारोह के अंतर्गत ‘संप सम्मान’ के तहत उन परिवारों को सम्मानित किया गया, जिनमें आज भी संयुक्त परिवार और कुटुंब प्रबोधन की परंपरा जीवंत है। सम्मान प्राप्त करने वालों में डॉ. आनंद गुप्ता, डॉ. पुष्कर लोहार और योगेश कुमावत शामिल रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. करुणा दशोरा ने किया। संस्था की सचिव राजेश्वरी राठौर ने बताया कि समारोह के तीसरे एवं अंतिम दिन गवरी का प्रीमियर होगा, साथ ही पलाश के अंतर्गत संगीत व नृत्य सहित विभिन्न लोक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। तीसरे दिन के साथ ही इस तीन दिवसीय समारोह का समापन होगा।
