
जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल मामले में 30 वर्षीय गर्भवती महिला गौरी गमेती की जान बचाई। 7 महीने की गर्भावस्था के दौरान महिला की बच्चेदानी फट गई थी, जिससे भारी रक्तस्राव होने के कारण वह शॉक की स्थिति में पहुँच गई थी। मरीज का शुगर लेवल 600 था और उसकी पहले भी तीन सीजेरियन डिलीवरी हो चुकी थी, जिससे मामला बेहद जोखिम भरा था।
राजस्थान के डूंगरपुर जिले में स्थित श्री हरिदेव जोशी जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल ऑपरेशन कर मानवता और चिकित्सा कौशल की मिसाल पेश की है। यहाँ 7 महीने की एक गर्भवती महिला की बच्चेदानी फटने के बाद उसे गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था, जिसे डॉक्टरों की टीम ने कड़ी मशक्कत और 10 यूनिट रक्त चढ़ाकर मौत के मुँह से बाहर निकाल लिया। सात दिनों तक चले उपचार के बाद अब महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कलालघाटा निवासी 30 वर्षीय गौरी गमेती, पत्नी विमलेश गमेती, को रात करीब 12 बजे अत्यंत नाजुक हालत में जिला अस्पताल के मातृ शिशु अस्पताल लाया गया था। गौरी 7 महीने की गर्भवती थी, लेकिन अचानक बच्चेदानी फटने (यूटेरस रप्चर) के कारण उसे असहनीय दर्द और भारी रक्तस्राव हो रहा था। अस्पताल पहुँचने तक महिला शॉक की स्थिति में जा चुकी थी। मामले की गंभीरता को बढ़ाते हुए डॉक्टरों ने पाया कि मरीज का शुगर लेवल भी 600 के करीब था और उसकी पहले भी तीन बार सीजेरियन डिलीवरी हो चुकी थी, जिससे यह केस ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में आ गया था।
डॉ. गजेंद्र कलाल ने बताया कि जाँच में गर्भ के अंदर ही शिशु की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी थी, ऐसे में प्राथमिकता माँ की जान बचाना था। डॉ. मोनिका परमार, डॉ. आशीष प्रजापति, डॉ. गजेंद्र और डॉ. प्रियंका की टीम ने तुरंत ऑपरेशन का फैसला लिया। डॉ. नीतू मौर्य द्वारा एनेस्थीसिया देने के बाद करीब ढाई घंटे तक जटिल सर्जरी चली। संक्रमण को रोकने और रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टरों को महिला की बच्चेदानी निकालनी पड़ी। ऑपरेशन के दौरान और बाद में मरीज को कुल 10 यूनिट रक्त चढ़ाया गया ताकि उसके शरीर में खून की कमी को पूरा किया जा सके।
ऑपरेशन के बाद गौरी को दो दिनों तक आईसीयू में विशेषज्ञों की सख्त निगरानी में रखा गया। धीरे-धीरे उसकी सेहत में सुधार होने लगा और सातवें दिन टांके हटाकर उसे पूरी तरह स्वस्थ हालत में घर भेज दिया गया। गौरी के पति विमलेश, जो मजदूरी का काम करते हैं, ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन का आभार जताते हुए इसे अपनी पत्नी के लिए नया जन्म बताया है। सरकारी अस्पताल की इस सफलता की पूरे जिले में सराहना हो रही है।
