MBBS डॉक्टर और सरकारी टीचर चला रहे थे ‘डमी कैंडिडेट’ का काला खेल

SOG ने 5 राज्यों में दबिश देकर दबोचा

जयपुर। राजस्थान में सरकारी नौकरी हथियाने के लिए रची जा रही साजिशों का एसओजी (SOG) ने एक बार फिर बड़ा भंडाफोड़ किया है। वरिष्ठ अध्यापक (सेकंड ग्रेड) भर्ती परीक्षा-2022 में असली अभ्यर्थियों की जगह डमी कैंडिडेट बैठाने वाले गैंग पर पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। इस कार्रवाई की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में समाज के ‘पढ़े-लिखे’ स्तंभ कहे जाने वाले 3 एमबीबीएस डॉक्टर और 2 सरकारी शिक्षक शामिल हैं। पुलिस ने अंडमान, कोलकाता, जालौर, कोटा और जयपुर में छापेमारी कर इन सफेदपोश अपराधियों को गिरफ्तार किया है।

40 लाख फोटो खंगाले, तब जाकर बेनकाब हुए चेहरे एडीजी (SOG) विशाल बंसल ने बताया कि यह मामला दिसंबर 2022 में हुई सेकंड ग्रेड भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। शातिर अपराधियों ने पहचान छिपाने के लिए केवल फोटो का सहारा लिया था, जो पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए एसओजी ने एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार करवाया। इस सॉफ्टवेयर के जरिए वन-टाइम रजिस्ट्रेशन के डेटाबेस में मौजूद करीब 40 लाख अभ्यर्थियों के फोटोग्राफ्स का मिलान किया गया। तब जाकर डमी कैंडिडेट और असली चेहरों के बीच का अंतर साफ हुआ। पकड़े गए आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

पोर्ट ब्लेयर से जालौर तक बिछाया जाल एसओजी की टीमों ने आरोपियों को पकड़ने के लिए देश के अलग-अलग कोनों में जाल बिछाया। आरोपी सहीराम को पोर्ट ब्लेयर (अंडमान-निकोबार) से पकड़ा गया, जबकि महिपाल को कोटा, महेश कुमार को जयपुर और हनुमाना राम व निवास कुराडा को जालौर से दबोचा गया। पुलिस अब इन डॉक्टरों और शिक्षकों की डिग्रियों और वर्तमान नियुक्तियों की भी जांच कर रही है। इस पूरे मामले में अब तक 12 मूल अभ्यर्थी, 9 डमी कैंडिडेट और 5 दलाल सहित कुल 26 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। एसओजी का दावा है कि जल्द ही इस रैकेट के कुछ और बड़े चेहरे सामने आ सकते हैं।

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