
उदयपुर। जहां एक ओर देश ‘बेटी बचाओ’ का नारा बुलंद कर रहा है, वहीं झीलों की नगरी उदयपुर में ममता को शर्मसार करने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर रूह कांप जाए। पीसीपीएनडीटी टीम ने एक जांबाज डिकॉय ऑपरेशन को अंजाम देते हुए अमर आशीष हॉस्पिटल की संचालिका डॉ. नीना सक्सेना और दलाल पूजा सागर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस पूरे खेल का सबसे काला पहलू यह है कि कोख के कत्ल की इस स्क्रिप्ट को लिखने वाली और इसे अंजाम देने वाली, दोनों ही महिलाएं थीं।
यह पूरी कार्रवाई किसी फिल्मी जाल की तरह बुनी गई थी। एएसपी डॉ. हेमंत जाखड़ के निर्देशन में टीम ने एक गर्भवती महिला को फर्जी ग्राहक बनाकर दलाल पूजा के पास भेजा। लालच में अंधी पूजा ने भ्रूण के लिंग की जानकारी देने के बदले 35 हजार रुपए का सौदा तय किया। वह गर्भवती महिला को शहर के अमर आशीष टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर लेकर पहुंची, जहां 60 साल की अनुभवी डॉक्टर नीना सक्सेना उसका इंतजार कर रही थी। डॉक्टर का लालच इस कदर हावी था कि उसने साफ शब्दों में कह दिया कि जब तक उसके हिस्से के 30 हजार रुपए टेबल पर नहीं आएंगे, वह कोख का राज नहीं खोलेगी।
जैसे ही रुपयों का लेन-देन हुआ, डॉक्टर ने मर्यादाओं को ताक पर रखकर कोख में ‘बेटा’ होने की पुष्टि कर दी। उसे भनक भी नहीं थी कि वह जिस कोख का सौदा कर रही है, वह उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने का रास्ता है। बाहर खड़ी टीम को जैसे ही इशारा मिला, उन्होंने अस्पताल में धावा बोल दिया। सफेद कोट पहनकर कोख का सौदा करने वाली डॉक्टर और दलाल पूजा अब पुलिस की गिरफ्त में हैं। एनएचएम एमडी डॉ. अमित यादव ने इस सफलता पर साफ संदेश दिया है कि बेटियों के दुश्मनों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। यह गिरफ्तारी समाज के उन सफेदपोश चेहरों पर करारा तमाचा है जो रुपयों की खातिर मासूम जिंदगियों को दुनिया में आने से पहले ही खत्म करने का धंधा चला रहे हैं।
