14 जनवरी को मकर संक्रांति, खत्म होगा खरमास, एक साथ शुरू होंगे शादी-ब्याह समेत सभी मांगलिक कार्य

नई दिल्ली।
14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ ही सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास (मलमास) का समापन हो जाएगा। इसके बाद बीते एक माह से रुके पड़े विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य सभी मांगलिक कार्य फिर से पूरे विधि-विधान से शुरू हो जाएंगे। शुभ कार्यों पर लगी रोक हटने से समाज और बाजार दोनों में रौनक लौटने की उम्मीद है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य जब धनु राशि में होते हैं तो उस अवधि को खरमास कहा जाता है, जिसमें मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। 14 जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और इसके साथ ही उत्तरायण काल की शुरुआत होगी। शास्त्रों में उत्तरायण को देवताओं का दिन बताया गया है, इसलिए इस काल में किए गए कार्यों को विशेष फलदायी माना जाता है।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व भी अत्यंत विशेष है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, सूर्य को अर्घ्य, दान-पुण्य और जप-तप करने की परंपरा है। तिल-गुड़, खिचड़ी, अन्न और वस्त्र का दान करने से पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मकर संक्रांति पर गंगा सागर मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। पश्चिम बंगाल के गंगा सागर में लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन गंगा स्नान और दान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा प्रयागराज सहित कई तीर्थ स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति को विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण, उत्तर भारत में खिचड़ी पर्व, जबकि पंजाब-हरियाणा में लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है। हर क्षेत्र में इस पर्व से जुड़ी अपनी सांस्कृतिक मान्यताएं और उत्सव की छटा देखने को मिलती है।

मकर संक्रांति के साथ ही शुभ मुहूर्त खुलने से शादी-ब्याह और मांगलिक आयोजनों का सिलसिला तेज होने की संभावना है। पंडितों के अनुसार आने वाले दिनों में विवाह के कई शुभ मुहूर्त बनेंगे, जिससे समारोह स्थलों, बाजारों और सेवा क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ेंगी।

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