
राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की स्पेशल यूनिट ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। बुधवार को के अजमेर जिले में एसीबी की टीम ने सिविल लाइन थाने में तैनात सहायक उप निरीक्षक (ASI) हरीराम यादव को रिश्वत की भारी-भरकम राशि के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। भ्रष्टाचार के इस खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब आरोपी एएसआई ने एक परिवादी से उसके मामले में कोर्ट में चालान पेश करने की एवज में खुलेआम सौदेबाजी शुरू कर दी। जांच में सामने आया कि आरोपी ने इस काम के बदले कुल 70 हजार रुपये की रिश्वत तय की थी, लेकिन उसे यह अंदाजा भी नहीं था कि उसकी हर चाल पर एसीबी की पैनी नजर है।
ट्रैप की इस पूरी कहानी को बेहद फिल्मी और गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया। परिवादी की शिकायत की पुष्टि होने के बाद एसीबी की टीम ने जाल बिछाया और 14 जनवरी को जैसे ही आरोपी हरीराम यादव ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 20 हजार रुपये की असली भारतीय मुद्रा और साथ में 8 हजार रुपये के डमी नोट स्वीकार किए, टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। 28 हजार रुपये की यह पोटली हाथ में लेते ही एएसआई के होश उड़ गए और वह रंगे हाथों पकड़ा गया। इस पूरी कार्रवाई को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना भाटी के निर्देशन में निरीक्षक मीरा बेनीवाल ने अपनी टीम के साथ सफलतापूर्वक पूरा किया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद आरोपी एएसआई को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। एसीबी के उप महानिरीक्षक के सुपरविजन में हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि खाकी की आड़ में काली कमाई करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और अब एसीबी इस केस की गहराई तक जाने में जुटी है ताकि भ्रष्ट तंत्र की जड़ों को हिलाया जा सके। विभाग की इस कार्रवाई से पूरे अजमेर पुलिस महकमे में सनसनी फैली हुई है और आम जनता के बीच एसीबी की साख और मजबूत हुई है।
