
रक्षक ही भक्षक बन जाए तो आम जनता का क्या होगा? ये कहावत हाल ही में राजस्थान के चूरू जिले में हुए घटनाक्रम पर सटीक बैठती है। एक महिला कांस्टेबल जो खुद पिछले दो महीनों से पुलिस विभाग से निलंबित चल रही है उसने थानेदार समेत 4 पुलिसकर्मियों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है। महिला की शिकायत के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
चूरू। राजस्थान के चूरू जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है जिसने कानून के रखवालों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। पुलिस विभाग की एक निलंबित महिला कांस्टेबल ने अपने ही विभाग के एक थानेदार और तीन अन्य पुलिसकर्मियों पर नशीला पदार्थ पिलाकर सामूहिक दुष्कर्म करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। पीड़िता का दावा है कि उसके साथ दरिंदगी का यह सिलसिला साल 2017 में शुरू हुआ था, जो साल 2025 तक लगातार जारी रहा। इस मामले ने न केवल पुलिस बेड़े में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि विभाग की साख पर भी गहरा धब्बा लगा दिया है।
पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) जय यादव को सौंपे गए अपने परिवाद में आपबीती सुनाते हुए बताया कि इस खौफनाक दास्तां की शुरुआत तड़के साढ़े तीन बजे एक होटल से हुई थी। आरोप है कि साल 2017 में ‘विक्की’ नाम के एक शख्स और एक कांस्टेबल ने उसे ड्यूटी का बहाना बनाकर होटल बुलाया, जहां उसे नशीला पदार्थ पिलाकर उसकी अस्मत लूटी गई। पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने अश्लील वीडियो और धमकियों के जरिए उसे जाल में फंसा लिया। इसके बाद एक थानेदार सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने मिलकर सालों तक उसका शारीरिक और मानसिक शोषण किया। शिकायत के मुताबिक, उसे डराया-धमकाया गया कि अगर उसने मुंह खोला तो उसका करियर बर्बाद कर दिया जाएगा।
महिला कांस्टेबल की इस लिखित शिकायत पर आंतरिक जांच के बाद अब मामला दर्ज कर लिया गया है। बुधवार को एफआईआर दर्ज होने के साथ ही पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। हालांकि, इस पूरे मामले में एक पेचीदा पहलू यह भी है कि पीड़िता खुद पिछले दो महीनों से विभाग से निलंबित चल रही है। उन पर ड्यूटी से नदारद रहने और कुछ संदिग्ध आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। ऐसे में पुलिस के उच्च अधिकारी इस मामले को दोहरे नजरिए से देख रहे हैं—क्या यह सालों से दबा हुआ एक महिला का वास्तविक दर्द है, या फिर निलंबन की कार्रवाई से बचने के लिए रचा गया कोई जवाबी दांव?
फिलहाल, पुलिस की विशेष टीमें साक्ष्यों को जुटाने और आरोपियों से पूछताछ की तैयारी में लगी हैं। 7 साल पुराने इन आरोपों की सत्यता जांचना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसमें शामिल आरोपी खुद कानून की बारीकियों को समझते हैं। एसपी का कहना है कि मामले की तह तक जाकर निष्पक्ष जांच की जा रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त करने के साथ-साथ कड़ी कानूनी सजा दिलाने की तैयारी है।
