
जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामला अब सिर्फ ठेके और फर्जी प्रमाण पत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ‘ब्यूरोक्रेट्स वर्सेज ब्यूरोक्रेट्स’ की खुली जंग में बदलता नजर आ रहा है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की ओर से लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद फरार चल रहे पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अपने पूर्ववर्ती और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत पर सीधा हमला बोला है।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में सुबोध अग्रवाल ने दावा किया है कि जल जीवन मिशन के तहत जिन दो फर्मों—गणपति और श्याम ट्यूबवेल—को फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर मिले, उनमें से 95 प्रतिशत वर्कऑर्डर उस समय जारी हुए जब वित्त समिति की अध्यक्षता तत्कालीन ACS सुधांश पंत कर रहे थे। अग्रवाल का कहना है कि उनके कार्यकाल में तो कुल टेंडरों की वैल्यू का 10 प्रतिशत से भी कम हिस्सा मंजूर हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि जांच एजेंसी केवल उनके कार्यकाल की ही जांच क्यों कर रही है।
अग्रवाल ने ACB पर ‘पिक एंड चूज’ की नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उनका तर्क है कि अगर टेंडर आवंटन की मुख्य प्रक्रिया पूर्व कार्यकाल में हुई थी, तो जांच का दायरा भी उसी अनुपात में तय होना चाहिए। उन्होंने कोर्ट में कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि फैसलों की बुनियाद पहले ही रखी जा चुकी थी।
इतना ही नहीं, सुबोध अग्रवाल ने खुद को घोटाले का आरोपी नहीं बल्कि खुलासा करने वाला अधिकारी बताया है। याचिका में उन्होंने कहा कि जैसे ही IRCON से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल उच्च स्तरीय समिति गठित की। उनकी पहल पर दोनों फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया और संबंधित टेंडर निरस्त किए गए। ACB जिस विशाल सक्सेना के बयान को आधार बना रही है, अग्रवाल का दावा है कि उसी के खिलाफ FIR भी उन्होंने ही दर्ज करवाई थी। उनके मुताबिक, इसी रंजिश के चलते उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की नौकरशाही में हलचल मचा दी है। एक ओर ACB की जांच जारी है, तो दूसरी ओर अदालत में दायर याचिका ने मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से और संवेदनशील बना दिया है। अब सबकी नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि 900 करोड़ के इस कथित घोटाले में जिम्मेदारी की सुई किस ओर घूमती है।
सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप
सुधांश पंत का नाम इस विवाद में घसीटे जाने से राजस्थान की नौकरशाही में खलबली मच गई है। पंत भजनलाल सरकार में मुख्य सचिव जैसे कद्दावर पद पर रह चुके हैं और वर्तमान में केंद्र में सचिव हैं। अग्रवाल की इस ‘नहले पर दहला’ वाली चाल ने सरकार और ACB दोनों को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। हाईकोर्ट इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है। क्या कोर्ट सुबोध अग्रवाल की FIR रद्द करेगा या जांच का दायरा सुधांश पंत के कार्यकाल तक बढ़ाया जाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।
