भीलवाड़ा में अर्थी से उठकर भागा युवक

भीलवाड़ा। शहर में होली के आठ दिन बाद शीतला अष्टमी पर 426 साल पुरानी अनोखी परंपरा निभाई गई। इस अवसर पर “मुर्दे की सवारी” निकाली गई, जिसमें एक युवक को अर्थी पर लिटाकर ढोल-नगाड़ों के साथ पूरे शहर में शवयात्रा निकाली गई। जुलूस की शुरुआत चित्तौड़ वालों की हवेली से हुई और यह शहर के मुख्य मार्गों, रेलवे स्टेशन चौराहा, गोलप्याऊ और भीमगंज क्षेत्र से होते हुए बड़े मंदिर तक पहुंचा।

यात्रा के दौरान लोग गुलाल उड़ाते हुए हंसी-मजाक करते नजर आए। बड़े मंदिर के पास पहुंचते ही अर्थी पर लेटा युवक अचानक उठकर खड़ा हो गया और ढोल की धुन पर नाचने लगा। कुछ देर बाद वह वहां से भाग निकला, जिसके बाद परंपरा के अनुसार प्रतीकात्मक रूप से अर्थी का दाह संस्कार किया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार इस परंपरा के दौरान फब्तियों और मजाक का दौर भी चलता है, इसलिए इसमें महिलाएं शामिल नहीं होती हैं। मान्यता है कि इस परंपरा को निभाने से समाज में आपसी मतभेद और कड़वाहट दूर होती है तथा सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। यही वजह है कि हर साल शहरवासी पूरे उत्साह और उमंग के साथ इस अनोखे आयोजन में भाग लेते हैं।

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