भीलवाड़ा में कोहराम, सीताराम डेनिम फैक्ट्री में जहरीली गैस ने ली 2 मजदूरों की जान, बॉयलर एरिया में अचेत मिले गजानंद और कमलेश

फैक्ट्री मालिक का फोन बंद, अस्पताल के बाहर आक्रोशित मजदूरों का प्रदर्शन; सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही का लगा बड़ा आरोप

भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा के रायला थाना क्षेत्र स्थित रायसिंहपुरा में बुधवार सुबह एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया है। यहाँ की मशहूर ‘सीताराम डेनिम’ कपड़ा फैक्ट्री में कार्यरत दो युवा मजदूरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रारंभिक जांच और मौके के हालात को देखते हुए अंदेशा जताया जा रहा है कि बॉयलर एरिया से निकली किसी बेहद जहरीली गैस के रिसाव के कारण दम घुटने से दोनों की जान गई है। मृतकों की पहचान गजानंद गाडरी (25) और कमलेश गुर्जर (24) के रूप में हुई है। इस घटना के बाद महात्मा गांधी अस्पताल के बाहर और फैक्ट्री परिसर में भारी तनाव व्याप्त है, जिसे देखते हुए तीन थानों की पुलिस को मोर्चे पर तैनात किया गया है।

हादसे की जानकारी तब मिली जब बुधवार सुबह करीब 8 बजे फैक्ट्री की शिफ्ट बदली जा रही थी। अन्य कर्मचारियों ने बॉयलर साइट पर गजानंद और कमलेश को जमीन पर बेसुध पड़ा देखा। आनन-फानन में दोनों को एम्बुलेंस से महात्मा गांधी अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। दोनों मजदूर पिछले 6 महीने से इसी फैक्ट्री में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हादसे की खबर मिलते ही फैक्ट्री के सैकड़ों मजदूर और मृतकों के परिजन अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर जमा हो गए और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि फैक्ट्री में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे और बॉयलर जैसे खतरनाक क्षेत्र में बिना किसी सुरक्षा उपकरणों और बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के मजदूरों से काम लिया जा रहा था।

मामले में फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना के बाद से ही फैक्ट्री मालिक जगदीश नुवाल का मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा है, जिससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। रायला थाना प्रभारी मूलचंद ने बताया कि पुलिस ने दोनों शवों को मोर्चरी में रखवा दिया है और परिजनों की रिपोर्ट मिलने के बाद मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच शुरू की जाएगी। फिलहाल सुरक्षा की दृष्टि से प्रतापनगर, रायला और मांडल थानों का पुलिस जाब्ता तैनात है, जो मजदूरों और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहा है।

मजदूरों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सीधा-सीधा कत्ल है, क्योंकि फैक्ट्री प्रबंधन ने मोटी कमाई के चक्कर में मजदूरों की जान को जोखिम में डाल रखा था। पीड़ित परिवार अब उचित मुआवजे और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं। पुलिस और जिला प्रशासन अब एफएसएल (FSL) टीम और माइनिंग/बॉयलर विशेषज्ञों की मदद से गैस रिसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुट गया है। जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आती और प्रबंधन सामने नहीं आता, तब तक भीलवाड़ा में स्थिति तनावपूर्ण बनी रहने की आशंका है।

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