आयुर्वेद का वरदान, मैताली में उमड़ा मरीजों का सैलाब, पंचकर्म चिकित्सा से मिली जटिल रोगों से मुक्ति

डूंगरपुर (भरत पंड्या)। जिले के मैताली में आयुर्वेद और प्राचीन चिकित्सा पद्धति की महत्ता उस वक्त जीवंत हो उठी जब राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय में निःशुल्क पंचकर्म एवं परामर्श शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर में स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए न केवल मैताली बल्कि डचकी, कोटाना, पिपलादा और डूंगरपुर शहर समेत आसपास के कई गांवों से मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी। राजकीय आयुर्वेद औषधालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ. जगदीश यादव ने इस मौके पर ग्रामीणों को जागरूक करते हुए बताया कि पंचकर्म चिकित्सा उन असाध्य और जटिल रोगों के लिए एक वरदान की तरह है, जो लंबे समय से व्यक्ति को कष्ट दे रहे हों। विशेषकर वृद्धावस्था की बीमारियों और गठिया जैसी समस्याओं में यह पद्धति चमत्कारिक परिणाम देती है।

शिविर की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ 270 से अधिक रोगियों ने अपना पंजीकरण कराया। इन मरीजों को घुटनों के दर्द, चर्म रोग, साइटिका, थायराइड, मधुमेह, मानसिक तनाव और श्वास रोगों जैसी विभिन्न समस्याओं के लिए विशेषज्ञों द्वारा उचित परामर्श दिया गया। इनमें से 40 से अधिक ऐसे मरीज थे जो गंभीर और जटिल रोगों से जूझ रहे थे, जिन्हें मौके पर ही पंचकर्म की विभिन्न विधाओं जैसे नस्य, कटी वस्ति, शिरो वस्ति और जानू वस्ति के माध्यम से तत्काल राहत पहुंचाई गई। सेवा के इस महायज्ञ में कैराली आयुर्वेद प्रोडक्ट का भी सराहनीय सहयोग रहा, जिनकी ओर से 100 जरूरतमंद मरीजों को विभिन्न बीमारियों की दवाइयां पूरी तरह निःशुल्क वितरित की गईं।

इस सेवाभावी आयोजन में डॉ. जगदीश यादव के साथ आयुर्वेद नर्स वंदना बलात, योग प्रशिक्षक ललित कुमार और आयुष सखी ममता रोत ने अपनी सक्रिय सेवाएं दीं। स्थानीय सरपंच काजल देवी सहित गट्टू लाल प्रजापत, पुष्पा देवी और पुरुषोत्तम पंड्या जैसे गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने शिविर के महत्व को और बढ़ा दिया। इस शिविर ने ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेद के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है, साथ ही यह संदेश भी दिया है कि प्राकृतिक और प्राचीन पद्धतियों के माध्यम से जटिल से जटिल बीमारियों का स्थाई समाधान संभव है।

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