
भरतपुर। राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना ‘आरजीएचएस’ (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) में सेंधमारी करने वालों के खिलाफ भरतपुर पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिला पुलिस अधीक्षक दिगंत आनंद ने अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए सात पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। गृह विभाग के निर्देश पर हुई प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन पुलिसकर्मियों ने नियमों को ताक पर रखकर योजना में भारी अनियमितताएं कीं और गलत तरीके से पुनर्भुगतान (रीइम्बर्समेंट) उठाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। निलंबित होने वालों में चार महिला कांस्टेबल मंजू कुमारी, सत्यवती, मिथिलेश कुमारी, योगेश कुमारी और तीन पुरुष कांस्टेबल प्रहलाद सिंह, जितेंद्र सिंह व मनोज कुमार शामिल हैं।
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस इलाज की सुविधा देने वाली इस जनकल्याणकारी योजना में हुए खेल ने महकमे की छवि पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद एसपी ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए यह सख्त कदम उठाया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को विस्तृत जांच सौंपी गई है ताकि घोटाले की गहराई तक पहुंचा जा सके। एसपी दिगंत आनंद ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई केवल पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहेगी। पुलिस अब उन मेडिकल स्टोर, फार्मेसी और डॉक्टरों की भूमिका की भी बारीकी से जांच कर रही है जिन्होंने इस साठगांठ में मदद की। मेडिकल विभाग से आरजीएचएस के तमाम रिकॉर्ड तलब किए जा रहे हैं ताकि संदिग्ध नेटवर्क को बेनकाब किया जा सके।
पुलिस विभाग की इस सर्जिकल स्ट्राइक से पूरे जिले के सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। जांच के घेरे में आए संदिग्धों के खिलाफ आने वाले दिनों में आपराधिक मामले (एफआईआर) दर्ज होना तय माना जा रहा है। एसपी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जनकल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई उन सभी के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी सुविधाओं का दुरुपयोग कर राजकोष को चूना लगाने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल विभाग के इस एक्शन ने अन्य सरकारी कार्मिकों के बीच भी खलबली मचा दी है।
