
शाहपुरा: राजस्थान के शाहपुरा में रविवार दोपहर एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसे देख प्रत्यक्षदर्शियों की रूह कांप गई। एक तरफ गैस सिलेंडर से उठती आग की लपटें थीं और दूसरी तरफ 6 महीने के मासूम पोते की जिंदगी। मौत को सामने खड़ा देख 55 साल की दादी ने जो साहस दिखाया, उसने ममता की एक नई मिसाल पेश कर दी है।
रसोई में अचानक भड़की आग
घटना रविवार दोपहर की है, जब विराटनगर निवासी इंदु जैन अपनी रसोई में खाना बना रही थीं। अचानक गैस सिलेंडर में रिसाव शुरू हुआ और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। घर के भीतर इंदु जैन के साथ उनकी बहू शिखा और 6 महीने का मासूम पोता आगम मौजूद थे। आग इतनी तेजी से फैली कि मुख्य दरवाजे से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया। घर का फ्रिज और अन्य कीमती सामान धूं-धूं कर जलने लगा और पूरे मकान में काला धुआं भर गया।
6 माह के पोते को बालकनी से नीचे फेंका
आग की लपटों के बीच फंसी इंदु जैन अपने पोते को सीने से लगाकर बालकनी की ओर भागीं। नीचे गली में उनके बेटे आयुष जैन खड़े थे, जो अपनी आंखों के सामने मां और बच्चे को जलता देख बेबस थे। आयुष ने हिम्मत जुटाकर ऊपर चिल्लाया ‘मां, बच्चे को नीचे फेंक दो, मैं पकड़ लूंगा’। ममता और डर के उस द्वंद्व में इंदु जैन ने एक पल की भी देरी नहीं की। उन्होंने कलेजे के टुकड़े 6 माह के आगम को बालकनी से नीचे की ओर छोड़ दिया। नीचे खड़े आयुष ने मुस्तैदी दिखाते हुए मासूम को हवा में ही सुरक्षित लपक लिया। बच्चे के सुरक्षित होते ही इंदु जैन ने खुद भी बालकनी से नीचे छलांग लगा दी।
दादी के दोनों पैरों में फ्रैक्चर, पर पोता बिल्कुल सुरक्षित
ऊंचाई से कूदने के कारण इंदु जैन जमीन पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। चिकित्सकों के अनुसार, इस हादसे में उनके दोनों पैरों में फ्रैक्चर आया है, लेकिन संतोष की बात यह है कि उनकी और मासूम आगम की जान बच गई है। सूचना मिलने पर दमकल की टीम मौके पर पहुंची और करीब 30 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
