जयपुर शिकार गन हाउस कांड, टाइगर की खाल पर सस्पेंस, 300 हथियारों ने बढ़ाई एजेंसियों की चिंता

जयपुर। राजधानी जयपुर में ‘शिकार गन हाउस’ से जुड़ा मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। शुरुआत एक हेड कांस्टेबल की गिरफ्तारी से हुई, लेकिन जांच आगे बढ़ते ही मामला टाइगर की खाल और अवैध हथियारों के नेटवर्क तक पहुंच गया है। एटीएस और वन विभाग की संयुक्त टीमें पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी हैं।

छापेमारी के दौरान गन हाउस मालिक के ठिकाने से टाइगर की खाल बरामद होने के बाद सनसनी फैल गई। आरोपी पक्ष का दावा है कि यह खाल तीन पीढ़ियों से उनके परिवार के पास है और यह उनकी विरासत का हिस्सा है, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों को शुरुआती जांच में यह खाल संदिग्ध लगी है। खाल पर रगड़ के निशान मिलने से आशंका जताई जा रही है कि इसे हाल ही में प्रोसेस किया गया हो सकता है। अब इसकी सच्चाई फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी।

कानूनी तौर पर बिना वैध दस्तावेज के टाइगर की खाल रखना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत गंभीर अपराध है। ऐसे में जांच एजेंसियां इस पहलू को भी गंभीरता से खंगाल रही हैं।

वहीं गन हाउस से करीब 300 हथियार और 282 कारतूस बरामद होने के बाद मामला और उलझ गया है। एटीएस को शक है कि कई हथियारों के सीरियल नंबरों के साथ छेड़छाड़ की गई है। इससे यह आशंका मजबूत हो रही है कि लाइसेंस की आड़ में अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त का नेटवर्क संचालित हो रहा था।

इस पूरे मामले की कड़ी जैसलमेर से जुड़ती नजर आ रही है, जहां 1 अप्रैल को पुलिस ने हेड कांस्टेबल अमीन खां और उसके साथी को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में सामने आया कि ये हथियार जयपुर के इसी गन हाउस से खरीदे गए थे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गन हाउस को सील कर दिया और मालिक के बेटे शमिमुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब संयुक्त एसआईटी गठित करने की तैयारी चल रही है। जांच एजेंसियां पिछले 10 सालों का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं और यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन हथियारों की सप्लाई किन-किन लोगों तक पहुंची। इस खुलासे के बाद कई रसूखदारों में भी खलबली मच गई है।

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