गूगल के विजन से लेकर भविष्य की नौकरियों तक

1. भारत के लिए संदेश: “हम केवल निवेशक नहीं, पार्टनर बनना चाहते हैं”

सुंदर पिचाई ने कहा कि भारत के लिए यह ‘हाइपर-प्रोग्रेस’ (अत्यधिक प्रगति) का समय है। गूगल भारत में फुल-स्टैक पार्टनर (शुरुआत से अंत तक का साथी) बनना चाहता है। इसका मतलब है कि गूगल भारत को केवल सॉफ्टवेयर ही नहीं, बल्कि डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग पावर, ओपन डेटासेट और स्वच्छ ऊर्जा (जैसे राजस्थान में 150 मेगावाट का प्रोजेक्ट) में भी मदद करेगा।

2. AI की रफ्तार: “विज्ञान कथा (Science Fiction) अब हकीकत है”

पिचाई ने AI संशयवादियों (Sceptics) को जवाब देते हुए कहा कि जो 10 साल पहले नामुमकिन लगता था, वह आज हो रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया:

  • सेल्फ-ड्राइविंग कारें: सैन फ्रांसिस्को में एक तिहाई यात्राएं अब बिना ड्राइवर वाली कारों से हो रही हैं।
  • गूगल में कोडिंग: गूगल के इंजीनियरों द्वारा किया जाने वाला अधिकांश कोडिंग कार्य अब AI-असिस्टेड (AI की मदद से) हो रहा है।
  • AlphaFold: भारत इसका चौथा सबसे बड़ा यूजर है, जहां 1.8 लाख से ज्यादा शोधकर्ता इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

3. भविष्य की नौकरियां: “AI-नेटिव बनें, डरें नहीं”

तकनीकी क्षेत्र में नौकरियों को लेकर व्याप्त चिंता पर पिचाई ने सलाह दी:

  • बदलाव को अपनाएं: जैसे कभी स्प्रेडशीट (Spreadsheet) आने पर एनालिस्ट्स ने उसे सीखा और ज्यादा सफल हुए, वैसे ही आज AI टूल्स को अपने काम का हिस्सा बनाना जरूरी है।
  • AI-Native बनें: तकनीक का विरोध करने के बजाय, यह सीखें कि ये टूल्स आपको 10 गुना ज्यादा उत्पादक (Productive) कैसे बना सकते हैं।

4. गूगल का टर्नअराउंड: पिछड़ने से लेकर आगे निकलने तक

जब ChatGPT लॉन्च हुआ, तो लगा गूगल पीछे है। पिचाई ने बताया कि यह सुधार कैसे हुआ:

  • 10 साल पुराना निवेश: गूगल ने एक दशक पहले ही ‘AI-First’ होने का फैसला कर लिया था। ज़्यादातर बुनियादी शोध (Foundational Research) गूगल में ही हुए थे।
  • सांस्कृतिक बदलाव: गूगल ने अपनी टीमों को फिर से व्यवस्थित किया (जैसे Google DeepMind बनाना) और निर्णय लेने की रफ्तार को ‘स्प्रिंट्स’ और ‘बूटकैम्प्स’ के जरिए तेज किया।

5. भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर: 15 अरब डॉलर का निवेश

गूगल भारत में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है:

  • विशाखापत्तनम (Vizag): यहां 15 अरब डॉलर का AI हब बनाया जा रहा है।
  • रिलायंस जियो के साथ साझेदारी: जामनगर में एक विशेष ‘क्लाउड रीजन’ बनाने पर काम चल रहा है।
  • स्वच्छ ऊर्जा: अडानी ग्रुप और क्लीनमैक्स जैसी कंपनियों के साथ मिलकर डेटा सेंटर्स के लिए बिजली का इंतजाम किया जा रहा है।

6. सुंदर पिचाई खुद AI का इस्तेमाल कैसे करते हैं?

पिचाई ने बताया कि उन्होंने अपने काम करने का तरीका पूरी तरह बदल लिया है:

  • निजी इस्तेमाल: अपने माता-पिता की मेडिकल रिपोर्ट को AI से स्कैन करवाकर जरूरी बातें समझना।
  • मीटिंग की तैयारी: किसी भी जटिल विषय (जैसे जियोथर्मल एनर्जी) पर मीटिंग से पहले AI से ‘ब्रीफिंग’ लेना।
  • क्रिएटिविटी: हाल ही में उन्होंने जेनरेटिव टूल्स का उपयोग करके मिनटों में एक ‘गेमिंग वर्ल्ड’ तैयार किया।

पिचाई का मुख्य विचार: “यह तकनीक आग या बिजली की खोज के बाद मानवता की सबसे बड़ी उपलब्धि है। आज एक कंप्यूटर वैज्ञानिक या इंजीनियर होने के लिए इससे बेहतर समय कभी नहीं रहा।”

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