राजसमंद। कुंभलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के संदुकोकामुड़ा-आंतरी-वरदड़ा इलाके में होटल निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। निर्माण कार्य के दौरान पारंपरिक जलस्रोतों, प्राकृतिक जलप्रवाह और श्मशान जाने वाले रास्ते को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
नाड़ी और प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रभावित करने का आरोप
प्रशासक विजय राम भील ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में चल रहे होटल निर्माण के दौरान नियमों की अनदेखी की जा रही है। उनके अनुसार, निर्माण कार्य से प्राकृतिक नाड़ी और आसपास के जलस्रोत प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि इन जलस्रोतों का स्थानीय लोगों के लिए पारंपरिक और सार्वजनिक महत्व है।
आरोप यह भी है कि मनरेगा के तहत नाड़ी क्षेत्र में बनाई गई दीवार के बाद वहां ऊंची दीवार का निर्माण किया गया है। इससे नाड़ी में पानी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, निर्माण की स्थिति और जलप्रवाह पर वास्तविक प्रभाव की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।

प्राचीन कुएं और श्मशान के रास्ते को लेकर भी चिंता
मामले में एक प्राचीन कुएं में मिट्टी डालकर उसे प्रभावित करने और नाड़ी क्षेत्र में निर्माण किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों ने श्मशान जाने वाले रास्ते पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सार्वजनिक रास्ते और पारंपरिक जलस्रोत प्रभावित होते हैं, तो इसका असर स्थानीय समुदाय की दैनिक जरूरतों पर पड़ सकता है। ऐसे में निर्माण कार्य की वैधता, भूमि की स्थिति और सार्वजनिक उपयोग के रास्तों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी मानी जा रही है।
अधिकारियों पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं करने का आरोप
प्रशासक विजय राम भील ने संबंधित विभागों के अधिकारियों पर शिकायत किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को मौके की स्थिति की जांच करनी चाहिए।
हालांकि, संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी सामने आना बाकी है। इसलिए निर्माण कार्य में नियमों के उल्लंघन और अधिकारियों की भूमिका से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, नाड़ी और प्राकृतिक जलस्रोतों की स्थिति का आकलन करने तथा श्मशान जाने वाले रास्ते से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में जांच के लिए क्या कदम उठाता है और पारंपरिक जलस्रोतों व सार्वजनिक रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।
