उदयपुर। श्राद्ध पक्ष की एकादशी से उदयपुर के मंदिरों में सदियों पुरानी और अनूठी जलसांझी कला की शुरुआत हुई। पानी की शांत सतह पर सूखे प्राकृतिक रंगों की मदद से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और विभिन्न धार्मिक प्रसंगों को बेहद बारीकी से उकेरा जा रहा है। पानी पर रंगों से सजी कृष्ण लीला श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
कलश मार्ग स्थित गोवर्धननाथ मंदिर में एकादशी से अमावस्या तक प्रतिदिन अलग-अलग जलसांझी सजाई जाएगी। हर दिन पानी की सतह पर नई कलाकृति के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और धार्मिक प्रसंगों को दर्शाया जाएगा।
वहीं राधावल्लभजी मंदिर में भी कलाकार राजेश पंचोली पानी पर कृष्ण लीलाओं को आकार देंगे। यहां श्रद्धालुओं के लिए शाम 7 बजे से जलसांझी के दर्शन होंगे।
सदियों पुरानी कला को बचाने की कोशिश
जलसांझी सिर्फ धार्मिक सजावट नहीं, बल्कि पानी की सतह पर रंगों से चित्र बनाने वाली एक दुर्लभ पारंपरिक कला है। बदलते समय के साथ यह कला धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही है।
उदयपुर के मंदिरों में जलसांझी के आयोजन के जरिए इस पारंपरिक कला को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। पानी की सतह पर बिना उसे छेड़े रंगों से कृष्ण लीलाओं को आकार देना इस कला की सबसे खास विशेषता मानी जाती है।
श्रद्धालु इन अनूठी जलसांझियों के दर्शन कर धार्मिक अनुभूति के साथ-साथ इस प्राचीन कला की खूबसूरती को भी करीब से देख सकेंगे।
