नाथद्वारा/खमनोर। राजसमंद जिले के खमनोर से सामाजिक बहिष्कार और कथित मानसिक प्रताड़ना का मामला सामने आया है। खमनोर निवासी 90 वर्षीय गोविंदराम फूल माली ने समाज के कुछ प्रभावशाली लोगों पर आरोप लगाया है कि उनकी गैरमौजूदगी में बैठक आयोजित कर उन्हें और उनके परिवार को समाज से बाहर करने का फैसला लिया गया। मामले में न्यायालय के आदेश के बाद खमनोर थाना पुलिस ने 10 नामजद लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परिवाद के अनुसार, 2 अगस्त 2026 की रात माली समाज के नोहरे में समाज की बैठक आयोजित की गई थी। गोविंदराम का कहना है कि उम्र अधिक होने और अकेले रहने के कारण वे बैठक में शामिल नहीं हो सके। आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति में पंचों ने उन्हें तथा उनके बेटों कांतिलाल और मोतीलाल के परिवारों को समाज से निष्कासित करने का फैसला सुना दिया।
बुजुर्ग का आरोप है कि इसके बाद परिवार को सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका गया। साथ ही उनके घर आने-जाने वाले लोगों को भी कथित तौर पर समाज से बाहर करने और जुर्माना लगाने की धमकियां दी गईं। परिवादी ने 3 अगस्त को आयोजित सामाजिक कार्यक्रम ‘गोरणी’ में परिवार को नहीं बुलाने और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का भी आरोप लगाया है।
₹5 लाख 32 हजार 900 रुपये लेने का आरोप
मामले में गोविंदराम ने पैसों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि समाज में वापस लेने के नाम पर पहले ही उनसे और उनके परिवार से अलग-अलग किस्तों में कुल 5 लाख 32 हजार 900 रुपये लिए जा चुके हैं। अब दोबारा राशि लेने के उद्देश्य से परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है।
गोविंदराम ने इस मामले में पहले 11 अगस्त को खमनोर थाने में शिकायत दी थी। इसके बाद 25 अगस्त को पुलिस अधीक्षक, राजसमंद के समक्ष भी शिकायत पेश की गई। पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट, नाथद्वारा के समक्ष परिवाद पेश किया।
न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने दर्ज किया मामला
न्यायालय के निर्देश के बाद खमनोर थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच एएसआई स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है।
मामले में जमनालाल, शिवशंकर, प्रेमप्रकाश उर्फ प्रभुलाल, नंदलाल, किशनलाल, श्रीकांत, गणेशलाल, कैलाश, नानालाल और शंभुलाल को नामजद किया गया है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि सामाजिक बहिष्कार, कथित धमकियों और पैसों की वसूली से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है। वहीं, मामले में नामजद लोगों का पक्ष और जांच के अन्य तथ्य सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
