जिस बप्पा को हाथ जोड़कर विदा किया, उन्हीं गणेश प्रतिमाओं का ऐसा हाल देखकर श्रद्धालुओं में नाराजगी
उदयपुर। गणपति विसर्जन के बाद उदयपुर से सामने आई कुछ तस्वीरों ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया है। जिन गणेश प्रतिमाओं की भक्तों ने कई दिनों तक पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा-अर्चना की, विसर्जन के बाद उन्हीं प्रतिमाओं की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अनंत चतुर्दशी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा को नम आंखों से विदाई दी। इस दौरान शहर में जगह-जगह गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किए गए। झीलों को प्रदूषण से बचाने के लिए नगर निगम की ओर से झीलों में प्रतिमा विसर्जन की अनुमति नहीं दी गई और इसके लिए कृत्रिम कुंडों में विसर्जन की व्यवस्था की गई।
हालांकि, सामने आई तस्वीरों को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि कृत्रिम कुंड में विसर्जन के बाद कई गणेश प्रतिमाओं को बाहर निकालकर मादड़ी फायर स्टेशन परिसर में कीचड़ और गंदगी के बीच रख दिया गया। तस्वीरों में गणेश प्रतिमाएं खुले स्थान पर दिखाई दे रही हैं, जिसके बाद श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़े सवाल उठने लगे हैं।

श्रद्धालुओं का कहना है कि जिन प्रतिमाओं के सामने कई दिनों तक पूजा-अर्चना की गई, फूल चढ़ाए गए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की गई, उन्हीं प्रतिमाओं को विसर्जन के बाद सम्मानजनक तरीके से रखने की व्यवस्था होनी चाहिए थी।
इसी बीच आरोप यह भी है कि अव्यवस्था के कारण कुछ गणेश प्रतिमाएं खंडित हो गईं। हालांकि, इन आरोपों और प्रतिमाओं के खंडित होने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
मामले को लेकर अब नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि झीलों में विसर्जन रोककर कृत्रिम कुंडों की व्यवस्था की गई थी, तो प्रतिमाओं को विसर्जन के बाद रखने और उनके उचित निस्तारण के लिए भी साफ-सुथरी और सुरक्षित व्यवस्था होनी चाहिए थी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए? झीलों को प्रदूषण से बचाना जरूरी है, लेकिन श्रद्धालुओं का कहना है कि इसके साथ गणेश प्रतिमाओं के सम्मान का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
अब लोगों की नजर नगर निगम की प्रतिक्रिया पर है कि सामने आई तस्वीरों के संबंध में प्रशासन का क्या कहना है और प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद की व्यवस्था को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
